Friday, 6 September 2019

सत्ता वापसी का मौका

सत्ता वापसी का मौका
देवानंद सिंह
आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है। वैसे तो, चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावों की दृष्टि से सभी राज्य महत्वपूर्ण हैं, लेकिन झारखंड कई लिहाज से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

बीजेपी के सामने जहां फिर से सत्ता वापसी का मौका है, वहीं विपक्षी दल भी किसी प्रकार की चूक नहीं करना चाहेंगे। चुनावी समीकरणों के साथ-साथ पिछले पांच साल के कार्यों को समीक्षात्मक दृष्टि से देख्ों तो बीजेपी राज्य में अभी मजबूत स्थिति में है और चुनाव को लेकर उसकी तैयारी भी अन्य पार्टियों से अधिक गति से चल रही है। सत्ता वापसी के लिए प्रभावी रणनीति बनाने में जुटी भाजपा इस बार हर हाल में जीतना चाहती है। इसके लिए वह अपना घर तो मजबूत कर ही रही है, विरोधियों को भी कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। भाजपा के लिए झारखंड कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा चुनाव के बाद से पार्टी के कम-से-कम आधा दर्जन नेता राज्य में प्रवास कर चुके हैं। जातीय समीकरणों को खास तवज्जो दी जा रही है और अलग-अलग नेताओं को अलग-अलग जातियों के नेताओं से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इतना ही नहीं, भाजपा ने उन बूथों की पहचान की है, जहां से उसे बढ़त हासिल नहीं होती है। उन बूथों के लिए अलग-अलग लोगों को तैनात किया जा रहा है।

विपक्षियों में सेंध
भाजपा नेता लगातार विपक्षी खेमे में शामिल नेताओं और विधायकों के संपर्क हैं। खासकर, लोकसभा चुनाव के बाद इसमें और तेजी देखने को मिल रही है। कांग्रेस से जुड़े कई नेता अनौपचारिक तौर पर इस बात को स्वीकार कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि यह संपर्क टेलीफोन या किसी अन्य माध्यम से नहीं किया जा रहा है, बल्कि भाजपा के लोग सीध्ो विपक्षी विधायकों और नेताओं के पास पहुंच रहे हैं। इसमें खास यह भी है कि दूसरे राज्यों से आकर लोग मिल रहे हैं। इस साफ होता है कि बीजेपी अपनी चुनावी रणनीति को कैसे अंजाम दे रही है। ऐसे में, साफ है कि विपक्षी दलों को भाजपा के बराबर आने के लिए अभी बहुत मेहतन करनी पड़ेगी। पार्टी के चुनाव प्रभारी ओम प्रकाश माथुर और सह प्रभारी नंद किशोर यादव राज्य का दौरा कर चुके हैं।

65 प्लस का लक्ष्य
बीजेपी की चुनाव मशीनरी राज्य में पूरी तरह सक्रिय है और पार्टी को हर हाल में 65 प्लस का लक्ष्य भ्ोदना है। विधानसभा चुनाव में दो तिहाई बहुमत हासिल करने की तैयारी में जुटी भाजपा ने एक किस्म की नई राजनीति को जमीन पर उतारा है। अब तक देखा जाता रहा है कि राजनीतिक दल अपना घर मतबूत करने में जुटते रहे हैं, लेकिन भाजपा ने इस बार विरोधियों को कमजोर करने पर खासा ध्यान लगा रखा है। पार्टी ने अपने घर को मजबूत बनाने पर तो ध्यान दिया ही है। इसी उद्देश्य को लेकर उसने राज्य में 25 लाख नए सदस्य बनाने का अभियान चला रखा है। इसके समानांतर पार्टी ने एक और अभियान विरोधियों को नेस्तनाबूद करने का जारी रखा है। इसके तहत विरोधी दलों के वैसे नेताओं से लगातार संपर्क किया जा रहा है, जो अपने इलाके में अच्छा-खासा प्रभाव रखते हैं।
पूरे राज्य में ऐसे कम-से-कम 2० नेताओं की पहचान की जा चुकी है और भाजपा के लोग उनसे नियमित संपर्क में हैं। ऐसी संभावना है कि ये नेता विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के ख्ोमे में शामिल हो सकते हैं।
भाजपा जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार के नेतृत्व में भाजपा का चुनावी अभियान तेज हो चुका है जिला अध्यक्ष दिनेश संगठन और कार्यकर्ताओं टीम भावना जगाने में सफल रहे हैं जिसका परिणाम मुख्यमंत्री रघुवर दास के जमशेदपुर प्रवास व सदस्यता अभियान के दौरान भी देखने को मिला प्रदेश भाजपा के साथ समन्वय स्थापित करने में भी जिला अध्यक्ष ने कोई कसर नहीं छोड़ी हम यह भी कह सकते हैं की टीम भावना की बदौलत भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार अपनी अग्नि परीक्षण विधानसभा चुनाव में भी सफलतापूर्वक देंगे इनकी मीडिया टीम अंकित आनंद और युवा टीम अमरजीत सिंह राजा के नेतृत्व में जिले में अव्वल काम कर रही है
जातीय समीकरणों को महत्व
विरोधी दलों के नेताओं को अपने ख्ोमे में करने के क्रम में भाजपा जातीय समीकरण पर भी ध्यान दे रही है। पलामू का उदाहरण सामने है। लोकसभा चुनाव से पहले गिरिनाथ सिंह को अपने पाले में करने के बाद भाजपा ने वहां ब्राह्मण नेताओं से संपर्क साधा है। पलामू का राजनीतिक समीकरण कुछ इस प्रकार का रहा है कि वहां अगड़ों का समर्थन कांग्रेस के पास था, जबकि पिछडे वोटों का बंटवारा होता था। भाजपा ने गिरिनाथ सिंह के बाद पूर्व विधायक दशरथ सिंह के पुत्र प्रफुल्ल सिंह को अपने पाले में करने के लिए राजी कर लिया है। अब पांकी विधायक देवेंद्र सिंह उर्फ बिट्टू सिंह पर भाजपा की निगाह है। यदि, वह भी भाजपा में आ जाते हैं तो विरोधी दलों के पास राजपूत नेताओं का टोटा पड़ जाएगा। इसी तरह ब्राह्मण नेताओं से भी भाजपा के संपर्क का रिजल्ट अगले कुछ दिनों में निकलेगा और इसके सकारात्मक होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगड़ी जातियों पर ध्यान देने से पहले भाजपा राज्य के प्रमुख यादव नेताओं से संपर्क साध चुकी है और इस बात के पूरे आसार हैं कि विधानसभा चुनाव आते-आते विरोधी दलों के पास यादव नेताओं का टोटा पड़ जाएगा।
आदिवासियों पर नजर
लोकसभा चुनाव में चाईबासा सीट हारने के बाद भाजपा ने आदिवासी मतों को साधने के लिए गंभीर कोशिश शुरू की है। इसके तहत कोल्हान में झामुमो को कमजोर करने की रणनीति तैयार की गई है। भाजपा ने कोल्हान के कम-से-कम पांच झामुमो विधायकों से संपर्क साधा है। इनमें खरसावां के दशरथ, गगराई, चक्रधरपुर के शशिभूषण सामड, मनोहरपुर की जोबा मांझी, चाईबासा के दीपक बिरुआ और बहरगोड़ा के कुणाल पाडंèगी शामिल हैं। चर्चा है कि ये विधायक पाला बदलने के लिए तैयार हो गए हैं। प्रदेश के नेताओंं के साथ साथ जमशेदपुर महानगर जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार के अपनी पूरी टीम के साथ चुनावी रणनीति में जुटे हैं मुख्यमंत्री रघुवर दास केेे प्रवास के दौरान जिस तरह से कार्यकर्ताओं का जनसैलाब कार्यक्रम में देखनेेे को वह दिनेश टीम की मेहनत का परिणाम है या यह भी कह सकते हैं कि दिनेश की अग्नि परीक्षा भी है
भाजपा की इस रणनीति की एक और खास बात यह है कि झारखंड के विरोधी दलों के नेताओं से संपर्क करने की जिम्मेदारी प्रदेश के नेता को नहीं दी गई है। यह जिम्मा केंद्रीय नेताओं के पास ही है। यह पूरा अभियान पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के निर्देशन में सौदान सिंह, भूपेंद्र यादव, धर्मपाल सिंह और अन्य के कंधों पर टिका हुआ है। मुख्यमंत्री रघुवर दास को इस पूरे अभियान समन्वय की जिम्मेदारी मिली है। भाजपा की इस रणनीति का जवाब फिलहाल विपक्षी दलों के पास नहीं है। झामुमो के साथ झाविमो, कांग्रेस और राजद के नेता अब तक पूरी तरह चुनावी मोड में नहीं आ सके हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि झारखंड विधान चुनाव के लिए भाजपा की तैयारी पुख्ता है और वह अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। इन हालातों में विपक्षी दलों को बहुत मेहनत करने की जरूरत है, तभी वे चुनावी मैदान में बीजेपी का मुकाबला कर सकेंगें

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