Thursday, 11 April 2019

समाज को बांटने की कोशिश

समाज को बांटने की कोशिश
लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान कल यानि 11 अप्रैल से शुरू हो जाएगा। इस चरण के लिए चुनाव प्रचार 9 अप्रैल को शाम पांच बजे समा’ हो गया था। पहले चरण में यूपी के कई क्ष्ोत्रों में व उत्तराखंड में चुनाव होने हैं। चुनाव हों और उसको लेकर कोई अपवाद न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता है। राजनेता जिस तरह संविधान और चुनाव आयोग की गाउडलाइन का मजाक बनाते हैं, ऐसे बहुत से उदाहरण चुनावी दौर में देखने को मिलते हैं। इस बार भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। चाहे वह आचार संहिता को ठेंगा दिखाने की बात हो या फिर समाज को धर्म-जाति व सम्प्रदाय के नाम पर बांटने की कोशिश।
यहां महज एक उदाहरण लेते हैं। यह वाक्या है सहारनपुर का। यहां एक जनसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने खुलकर मुस्लिम मतदाताओं से कहा कि अपना वोट बंटने न दें, बल्कि वे एकमुश्त होकर बसपा-सपा और रालोद प्रत्याशियों को ही वोट दें। मायावती द्बारा इस तरह से वोट मांगने का तरीका चुनावों के लिए बनाए गए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 कानून के पूरी तरह खिलाफ है। इस कानून के तहत धार्मिक आधार पर वोट मांगने की सख्त मनाही है। इसके बाद भी अगर, मायावती ने खुली सभा में धार्मिक आधार पर वोट मांगे तो क्या यह जनप्रतिधित्व अधिनियम के खिलाफ नहीं है। हमेशा हम धर्मनिरपेक्ष देश व समाज में रहने की बात करते हैं, अगर, उसके बाद भी हम अपने राजनीतिक फायदे व महत्वाकांक्षा के लिए समाज व देश को धर्म-जाति व सम्प्रदाय के नाम पर बांटने की कोशिश करते हैं तो यह निहायत ही गलत और देश के संविधान के मूल के खिलाफ है।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में इस तरह के वाक्ये पहले भी सामने आते रहे हैं, जब कुछ पार्टियां इस बात को मानकर चलती हैं कि विश्ोष समुदाय और जाति के लोग सिर्फ उन्हीं को वोट करेंगे। वोट के आकड़ों से भले ही यह पता चलता भी है तो इसमें कोई गुरेज नहीं है। संबंधित लोगों की किस पार्टी और विचारधारा में अधिक आस्था है, यह वह ही बता सकता है, लेकिन जब एक जनप्रतिनिधि खुले तौर पर वोट मांगता है तो इसका मतलब तो यही है कि वह समाज को धर्म-जाति और सम्प्रदाय के रूप में बांट रहा है। समाज में साम्प्रदायिक उन्माद को फैलाने की कोशिश करता है। इस तरह का उदाहरण मायावती से ही जोड़कर नहीं देखा जा रहा है बल्कि दूसरी पार्टियां भी इस तरह की स्थितियों को पैदा करने की कोशिश करती रहती हैं। इसका कारण यही है कि आज समाज के अंदर इस तरह का खांचा तैयार हो गया है, जिसमें हर कोई स्वयं को एक-दूसरे से अलग पाता है। एक-दूसरे से डर की भावना उसके अंदर बनी रहती है। यह स्थिति तब और खतरनाक हो जाती है, जब कोई राजनीतिक पार्टी सत्ता हासिल करने में सफल हो जाती है और उस जाति व सम्प्रदाय के लोगों के लिए काम नहीं करती है,जो उसके वोट बैंक का हिस्सा नहीं होता है। यह स्थिति देश के संविधान के मूल के खिलाफ है। देश का मूल धर्मनिरपेक्षता है। भारत को दुनिया का सबसे बड़ा और सफल लोकतंत्र बनाने में इसी मूल की सबसे बड़ी ताकत रही है, लेकिन लोकतांत्रिक इतिहास के पन्ने खोदकर देख्ों तो हमारी राजनीतिक पार्टियों ने देश को एकसूत्र में बांधने के बजाय उन्हें धर्म-जाति और सम्प्रदाय के खांचों में बांट दिया। इसके पीछे महज उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जिम्मेदार रही है। इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक पार्टियों के पास बहुत सारे तथ्य हैं, लेकिन देश के विकास को लेकर उनके पास कोई भी खाका नहीं है। यही वजह है कि आजादी के लंबे अर्से के बाद भी देश में गरीबी, अशिक्षा और आर्थिक असमानता बनी हुई है।
देश में किसानों की हालत किसी से छुपी नहीं है, वे आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। देश भ्रष्टाचार, कालाबाजारी के मकड़जाल में ऐसा फंसा हुआ है कि उसे इन परिस्थितियों से निकलने में बहुत लंबा समय लगेगा। समाज में दंगे, फसाद कराने की मूल जड़ भी हमारी राजनीतिक पार्टियां ही रही हैं, लेकिन इस परिपेक्ष्य में देश की जनता हमेशा जागरूक होती जा रही है। उसे राजनीतिक पार्टियों की मूल भावना समझ में आ गई है, लिहाजा, वह अपने मत का प्रयोग विवेकशीलता के साथ करने लगी है। उसके मन में विकास, रोजगार और तरक्की का खाका है। जिस पर राजनीतिक पार्टियों को भी अपना गोल सेट करना होगा। उनका यह फार्मुला किसी तरह से काम नहीं करेगा, जिसमें वे समाज को जाति-धर्म व सम्प्रदाय के नाम पर बांटने की कोशिश करते हैं।

Wednesday, 20 March 2019

होली की अदालत

🙏🌅नमस्कार 🌅🙏
🌹आपका राष्ट्र आपका संवाद 🌹
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सजनी की आँखों में छुप कर जब झाँका
बिन होली खेले ही साजन भीग गया
🙏🌹जमशेदपुर संवाद🌹🙏
✍मुख्यमंत्री ने की दूसरी शादी बधाई देने पहुँची  ममता बनर्जी ।
✍हेमंत सोरेन का जेएमएम से इस्तीफा ,खेती करने का किया फैसला ।
✍बाबूलाल मरांडी ने जेवीएम पार्टी का किया भाजपा  में विलय ।
✍पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा बने उड़ीसा  के राज्यपाल
✍मंत्री सरयू राय का इस्तीफा चले बिहार । बन्ना गुप्ता पहुँचे मनाने।
✍साहित्यकार हरिबल्लभ सिंह आरसी बॉलीवुड में फिल्म निर्माण करेगें
✍अभिभावक किशोर कुमार हेमामालिन के साथ फरार विरसानगर थाना में मामला दर्ज
✍आजसू सुप्रीमो सुदेश महतों बने पंजाब के उपमुख्यमंत्री।
✍ कोल्हान के डीआईजी  बने बिहार के डीजीपी
✍कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी पहुँचे जेवीएम कार्यालय फिर पार्टी को करेंगे खड़ा
✍भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेश शुक्ल ने राजनीति छोड़कर  शुरू किया कपड़े का व्यापार ।
✍कांग्रेस जिला अध्यक्ष बिजय खान भाजपा में शामिल
✍भाजपा जिला अध्यक्ष दिनेश हुए गुमशुदा । पुलिस में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे  मामा रघुवर दास !
✍भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी जेएमएम में शामिल
✍विधायक कुणाल षाड़ंगी कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ेगे धनबाद से
✍पञकार कौशल राखी सावंत के साथ मुम्बई में दिखे
✍पञकार  जितेंद्र प्रियंका चोपड़ा के साथ होटल सिटी इन में देखे गए
✍जेवीएम जिला अध्यक्ष बबुआ सिंह ने किया सन्यासी बनने का फैसला, निकले कुंभ की ओर  ।
✍आजसू संयोजक चंद्रगुप्त सिंह पहुँचे राहुल के पास ।
✍जेवीएम के केन्द्रीय महासचिव अभय सिंह को सरयू राय ने कराया भाजपा में शामिल
✍भाजपा नेता भरत सिंह बने यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ।
✍लीपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष सिंह बने डीएभीपी के डीजी
✍पञकार मनोरंजन सिंह बने आज तक के संपादक
✍प्रभात खबर के स्थानीय संपादक  इंडिया टूडे के संपादक
✍इस्पात मेल के निदेशक छोटकू जी बने प्रेस काउंसिल के चेयरमैन
✍चमकता आईना के संपादक जयप्रकाश राय ने दिया इस्तीफा चले बनेंगे सहारा के संपादक
✍उदितवाणी से राधेश्याम अग्रवाल का इस्तीफा उदित अग्रवाल को भी किया किनारा मचा कोहराम
✍ब्रह्मर्षि विकास मंच के संस्थापक महासचिव राजकिशोर सिंह ने किया दूसरी शादी बधाई देने पहुंचे से अध्यक्ष विकास सिंह
✍समाजसेवी सह ब्रह्मर्षि विकास मंच ( भी) जमशेदपुर के अध्यक्ष विकास सिंह बनेंगे करणी सेना के अध्यक्ष
✍ ब्रह्मर्षि विकास मंच के महासचिव अनिल ठाकुर बने दलित सेना के प्रवक्ता
✍अंजनी पांडेय का सहारा से छुट्टी पहुँचे इंडिया न्यूज
✍पञकार ब्रजेश बने दैनिक जागरण के संपादक
✍पञकार रवि झा बने मिथलांचल टीवी हेड
✍पञकार अन्नी जी ने टीवी की ओर किया रूख
✍फोटो ग्राफर उमाशंकर दुबे बने मुख्यमंत्री के सलाहकार
✍पञकार सतेेन्द्र ने थामा हरिनारायण जी का फिर से दामन
✍पञकार संदीप डालटनगंज प्रभात के होंगे संपादक
✍कवयित्री डॉ कल्याणी कबीर ने कविता को कहा अलविदा,  बनी संन्यासिनी
✍राष्ट्र संवाद के प्रबंध संपादक रश्मि सिंह बनाएँगी कॉमेडी फिल्म
✍डॉ अनिता शर्मा का स्कूल से इस्तीफा बनाएँगी मॉल
✍ब्रह्मर्षि विकास मंच( पी )के अध्यक्ष राम प्रकाश पांडे का इस्तीफा करेंगे राजपूताना रेजीमेंट का प्रतिनिधित्व
✍वास्तु विहार से कृष्णा राय का इस्तीफा सुधीर सिंह से मिलाया हाथ
✍सीएम के पीएस एम चौधरी बने अमित शाह के पीएस
✍मुख्यमंत्री ओएसडी राकेश चौधरी बने पीएम के ओएसडी
✍ नगर विकास विभाग के सहायक निदेशक संजय पांडेय बने राजभवन के  प्रवक्ता
✍न्यूज कोल्हान के केशरी करेंगे फिल्म निर्माण
✍समाचार विचार छोड़ राज करेंगे देश पर राज
✍विवेक बने बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष
✍आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय राय ने लिया पञकारिता छोड़ने का निर्णय करेंगे रामायण पाठ
✍पञकार अशोक झा बने मिथलांचल अखबार के संपादक
✍राष्ट्र संवाद के जीएम धीरज बनाएँगे आरक्षण मुक्त भारत
✍ जमशेदपुर उपायुक्त अमित कुमार बने चुनाव आयोग के चेयरमैन
✍ एसएससी जमशेदपुर वृंदावन में राधिकाओं के  साथ मना रहे हैं होली
✍सिटी एसपी प्रभात कुमार बने रॉ के निदेशक
✍राष्ट्र संवाद के अमित मिश्रा बने पुलिस पदाधिकारी
✍पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा  बिरसा नगर थाना प्रभारी भूषण कुमार बने अध्यक्ष
✍ पत्रकार अजय महतों बने शिबू सोरेन के सलाहकार
✍ पत्रकार प्रियरंजन लड़ेंगे चुनाव
✍ जमशेदपुर के उपायुक्त का तबादला बने मुख्य सचिव
✍ SSP जमशेदपुर बने डीजीपी झारखंड
✍ पत्रकार श्याम दैनिक भास्कर छोड़ संभालेंगे चमकता आईना
✍ पत्रकार अश्वनी पत्रकारिता छोड़ टाटा वर्कर्स यूनियन के बने अध्यक्ष
✍ पत्रकार शंभू श्रवण पत्रकारिता को किया अलविदा करेंगे ठेकेदारी
✍ भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह ने किया भाजपा को टाटा कांग्रेस में शामिल
✍ भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले भाजपा छोड़ पहुंचे बाबा के दरबार में
✍ बारीडीह के मुरारी चले मायावती से भेट  करने
✍भाजपा के जिला प्रवक्ता अंकित आनंद ने संभाला कांग्रेस  प्रवक्ता प्रभार
✍अमन कुमार चले राष्ट्र संवाद को लेकर अरणव की राह पर
✍सांसद विद्युत वरण महतो राज्यसभा सांसद रेखा के साथ चल दिए हनीमून पर मचा कोहराम
✍कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय खान बने आरएसएस प्रमुख
✍भाजपा के चाणक्य अनिल सिंह कन्हैया कुमार को टक्कर देंगे बेगूसराय में
✍कांग्रेस कोल्हान के प्रवक्ता राकेश तिवारी व सुरेश धारी का इस्तीफा गिलुआ ने कराया भाजपा में शामिल
✍भाजयुमो से सौरभ ने किया पूर्वी विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी
✍कांग्रेसी नेता ऋषि पांडे भाजपा में शामिल
✍ जमशेदपुर के सिविल सर्जन बने aiims के डायरेक्टर
✍ पत्नी प्रेम में प्रज्ञा प्रवाह संयोजक मयंक रंजन झारखंड छोड़ भागे
✍ राष्ट्र संबाद के विजय शंकर मिश्रा और रत्नेश कुमार बाज पैसे लगेंगे चुनाव
✍ राष्ट्र संवाद की हिटलर बनी रुपम
✍ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय फिर से करेंगे डॉक्टरी  कांग्रेसियों को लगी बीमारी
✍ हिंदुस्तान मित्र मंडल मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक संदेश चौधरी बने लोयला के प्राचार्य
✍राष्ट्र संवाद के पत्रकार सौरभ, निजाम, गौरव ,अरविंद, कृष्ण कुमार ,मुकेश ,अर्जुन शाही, गोपियों के साथ रंग खेलने में मस्त
✍ केंद्रीय शांति समिति के महासचिव  रामबाबू सिंह, अरुण सिंह अरविंद पांडे के साथ वास्तु विहार से राजेश मिश्रा कंगना रावत के साथ फरार बिष्टुपुर थाने में मामला दर्ज
✍अप्पू तिवारी बने भीम सेना के संयोजक
✍सभी मित्रों की धर्म पत्नी ने संभाला होममिनिटर का प्रभार
*बुरा न मानो होली है*
भांग थोड़ा ज्यादा पी लिया खबरीलाल ने
*आप सभी और आपके परिवार को "होली की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं"*
🌹आपका दिन मंगलमय हो 🌹
🙏🌹 धन्यवाद 🌹🙏
🙏🌹देवानंद सिंह 🌹🙏
🌹संपादक 🌹
🌅 राष्ट्र संवाद🌅

Thursday, 28 February 2019

रघुवर सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है और अफसरशाही हावी:राकेश तिवारी

विज्ञापन की सरकार को जड़ से उखाड़ने का काम करेगी कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं के लिए चुनौती बनी राहुल गांधी की उलगुलान रैली, रैली की सफलता के लिए कांग्रेस में एक जुटता दिखाई दे रही है सभी वरिष्ठ नेता अपनी अहम को छोड़ कर कार्यक्रम की तैयारी में लगे हैं राहुल की रैली से पहले माहौल बनाने के लिए पूरे प्रदेश के कांग्रेसी नेता जुटे हुए हैं खुद रैली की मॉनिटरिंग प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अजय के साथ साथ झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह सह प्रभारी उमंग सिंघार मंत्री वन एवं पर्यावरण मध्य प्रदेश के साथ मैनुल हक कर रहे हैं

प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी उलगुलान रैली के माध्यम से कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम कर रहे हैं जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इस रैली के माध्यम से झारखंड में चुनावी माहौल बनाने का प्रयास करेंगे
इस रैली में कोल्हान की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कोल्हान के प्रवक्ता राकेश तिवारी भी दिन रात एक किए हुए हैं इसी कड़ी में संवाद की अदालत में राकेश तिवारी को लाने का काम राष्ट्र सवाद ने किया है
प्रश्न: पुलवामा हमले के बाद आखिर झारखंड में रैली की क्या आवश्यकता थी
उत्तर: थोड़ा रुक कर राकेश तिवारी ने कहा की भाजपा सरकार चाहे केंद्र सरकार या राज्य सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है सेना की शहादत पर प्रधानमंत्री खुद सियासत कर रहे हैं और अपने नेताओं से सियासत करवा रहे हैं तिवारी ने कहा कि
कर्नाटक के पूर्व भाजपाई मुख्यमंत्री वीएस येदयुरप्पा नेे कहा कि एयर स्ट्राइक से मोदी लहर पैदा हुई है। इस बयान को लेकर कोल्हान के प्रवक्ता राकेश तिवारी ने पूर्व सीएम पर निशाना साधा है राकेश तिवारी ने कहा है की सरकार हर मोर्चे पर विफल है सेना के बल पर सियासत करने से परहेज करना चाहिए
उन्होंने कहा कि जवानों का जीवन चुनावी राजनीति से ज्यादा कीमती है
प्रश्न: रघुवर सरकार  के कार्यकाल को कितने मार्क्स देते हैं
उत्तर: जिस सरकार में मंत्री और विधायक सरकार के कामों से खुश नहीं है उस सरकार को नंबर पाने का कोई हक नहीं यह सरकार विज्ञापन की सरकार है और कांग्रेस इस सरकार को जड़ से उखाड़ने का काम करेगी राहुल गांधी उलगुलान रैली के माध्यम से कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे वहीं कांग्रेस कार्यकर्ता सरकार की खामियों घर घर पहुंचाने का काम करेगी
प्रश्न: मालिकाना हक के मुद्दे को आप किस तरह देख रहे हैं और पीएम आवास योजना से कितने लोगों को फायदा होगा
उत्तर: मालिकाना हक के मुद्दे को लेकर रघुवर विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर तय की है लेकिन मालिकाना का मुद्दा वही का वही रहा अब जब चुनाव सामने है तो फिर जनता के सामने जुमलेबाजी चालू हो चुका है मालिकाना हक तो मिला नहीं अब पीएम आवास के नाम पर जनता की भावनाओं से रघुवर कर रहे हैं खिलवाड़
 प्रश्न: उलगुलान रैली को आप किस तरह मापते हैं
उत्तर: उलगुलान रैली झारखंड की धरती पर मील का पत्थर साबित होगा
प्रश्न: झारखंड में भ्रष्टाचार और अफसरशाही को आप किस नजरिए से देखते हैं
उत्तर: वर्तमान सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है और अफसरशाही हावी हुआ है वर्तमान सरकार सिर्फ और सिर्फ अखबारों के माध्यम से विकास कर रही है जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है यह सरकार उद्योगपतियों की सरकार है इस सरकार में स्वास्थ्य सेवाएं शिक्षा के क्षेत्र घोर अनियमितता हुआ है
 प्रश्न :लोकसभा की कोल्हान  की सीटों को लेकर आप क्या कहना चाहेंगे
उत्तर: लोकसभा चुनाव में कोल्हान की दोनों सीटों पर कांग्रेस मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और विजय हासिल करेगी
प्रश्न: लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव की तैयारी भी पार्टी अभी से कर रही है क्या?
उत्तर: सवाल चुनाव का नहीं है सवाल है जनता के हित की रक्षा कैसे की जाए कांग्रेस पार्टी जनता की पार्टी है और जनता के हित के लिए कांग्रेस हमेशा से खड़ा रही है
प्रश्न: क्या आप भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं
उत्तर :कुछ सोच कर देखिए अभी उचित समय नहीं है इस पर कुछ बोलने का परंतु आलाकमान का आदेश शिरोधार्य है पार्टी अगर खुद जवाबदेही देगी तो उस पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा
 
 
 

Wednesday, 6 February 2019

विधानसभा: घपलों का अड्डा

कड़वा सच...
  पावर के नशे में किस प्रकार कोई भी काम आसानी से किया जा सकता है, यह झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष व वहां तैनात रहे अधिकारियों से सीख सकता है। बशर्ते, सरकार व सरकारी अधिकारी राज्य के विकास की दलीलें देते रहें, लेकिन विधानसभा में कड़ी-दर-कड़ी जिस तरह के घपले सामने आ रहे हैं,  उसने सभी को हैरत में डाल दिया है।  उच्च पदों पर बैठे अधिकारी अपनी जेब भरने व अपने लोगों को फायदा देने के लिए कैसे नियमों को दरकिनार कर देते हैं, इसका बड़ा उदाहरण विधानसभा में हुई घपलेबाजी है।
 चाहे वह भत्तों के वितरण को लेकर बरती गई अनियमितता हो या फिर नियमों की अनदेखी कर बाहरी लोगों की भर्ती का मामला हो। वहीं, प्रोन्नति में आरक्षण के नियमों की अनदेखी से लेकर बिना अनुभव के लोगों को बड़ी जिम्मेदारी देने का मामला क्यों न हो। ऐसे मामलों की फेहरिस्त और भी लंबी है। इन घोटालों के सामने आने के बाद बजट सत्र बहुत हंगामेदार होने की प्रबल संभावना है। विपक्षी इन सब मामलों को लेकर जहां सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करने की तैयारी में जुटे हुए हैं, वहीं सरकार किस प्रकार अपना बचाव करेगी, यह अपने-आप में बड़ा मुद्दा है।

गुरुदत्त दायित्व भत्ता
गुरुदत्त दायित्व भत्ते के वितरण में अनियमितता बरतने के लिए विधानसभा में तैनात अधिकारियों ने तो कमाल कर दिया। फेरबदल की ऐसी तरकीब निकाल डाली कि कुल 98 लाख रुपए का घोटाला कर डाला। दरअसल, इससे संबंधित पत्रावली में जहां-जहां अवर सचिव लिखा गया था, वहां पर अवर को वाइटनर के प्रयोग से मिटा दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि गुरुदत्त दायित्व भत्ता, जो अवर सचिव स्तर के अधिकारियों तक ही मिलता था, उसे सचिव स्तर तक कर दिया गया, क्योंकि सचिव के आगे लिखे अवर शब्द को वाइटनर से मिटा दिया गया। इस फेरबदल की वजह से लगभग 98 लाख रुपए का गलत तरीके से भुगतान अवर सचिव से अपर सचिव स्तर तक के अधिकारियों तक को किया गया। इस घाटाले की जांच में जुटी न्यायिक जांच आयोग ने तत्कालीन सचिव श्री अमरनाथ झा को दोषी माना है और उनसे 98 लाख रुपए वापस करने की मांग की गई है।



बाहरी लोगों की दी नियुक्ति
झारखंड विधानसभा सचिवालय में जमकर आरक्षण नीति का उल्लंघन भी किया गया और राज्य के बाहर के लोगों को नियुक्ति दी गई। ऐसा अधिकारियों ने अपने लोगों को भर्ती करने के लिए किया। झारखंड की आरक्षण नीति के अनुसार झारखंड राज्य से अलग किसी भी जाति एवं व्यक्ति को आरक्षण का लाभ देय नहीं है, लेकिन झारखंड विधानसभा सचिवालय में कुल 19 लोगों को गलत आरक्षण देकर नियुक्त कर दिया गया। इस मामले में खुलेतौर पर झारखंड राज्य के लोगों के अधिकारों का हनन किया गया, जबकि ऐसे पदों पर राज्य के लोगों का ही हक था। इनमें मुख्य रूप से निजी सहायक पद पर जैकी अहमद व संजय कुमार की नियुक्ति की गई। ये दोनों बिहार राज्य के निवासी हैं। यहीं नहीं, ओबीसी के तहत आरक्षण का लाभ देते हुए भी नियुक्तियां दी गईं। उसी तरह अनुसेवक में मुन्नी लाल सोरेन, प्रेमलता मरांडी, रेणु गुप्ता की तैनाती की गई। ये सब भी बिहार के रहने वाले ही हैं और इन्हें भी आरक्षण का लाभ देने के नाम पर तैनात किया गया। न्यायिक जांच आयोग ने जांच के क्रम में कुल 19 ऐसे लोगों को गलत तरीके से आरक्षण का लाभ देते हुए नियुक्त किया गया है, उन्हें बर्खास्त करने की अनुशंसा की है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी ऐसे लोगों का बर्खास्त करने का आदेश दिया है।


विज्ञापन सेवा शर्तों का उल्लंघन
घोटालों की फेहरिस्त में विज्ञापन सेवा शर्तों की अनदेखी का मामला भी जुड़ा है। असल में, यह मामला नियुक्ति के संबंध में निकाले गए विज्ञापन में सेवा शर्तों का खुलेआम उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि नियुक्ति के लिए भरे गए मूल आवेदन की छटनी में भी अनियमितता बरती गई। इसके तहत राजनेताओं के करीबी विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्र के लोगों को बहाल कर दिया गया। जैसे प्रतिवेदन के लिए नियुक्ति के लिए अशुलिपि की गतिसीमा संबंधी प्रभाव-पत्र नहीं रहने के बावजूद भी इंदर सिंह नामधारी के गृह जनपद पलामू के नौ लोगों का चयन कर दिया गया। आलम यह है कि राज्य विधानसभा में काम कर रहे 29 प्रतिवेदकों में 10 के पास आज तक आशुलिपि गतिसीमा, जो विज्ञापन में मांगी गई थी, उससे संबंधित प्रभाव-पत्र ही नहीं है और वे आज द्वितीय श्रेणी के अफसर बने हुए हैं। इस घपले में कई लोगों के नाम सामने आए हैं। और न्यायिक जांच आयोग ने नियुक्ति के लिए भरे गए मूल आवेदन की गलत छटनी करने वाले विधानसभा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा की है, इनमें संयुक्त सचिव राम सागर, रवीन्द्र कुमार सिंह, तेज नारायण पाण्डेय एवं श्री अहमद अप्सानो अंजुम आदि शामिल हैं, जिन्हें बर्खास्त करने की अनुशंसा की गई है। इसके इतर तकनीकी पदों पर ऐसे लोगों को बहाल कर दिया गया, जो संबंधित योग्यता ही नहीं रखते थे। जैसे प्रतिवेदक में 10 लोग, जिनका आशुलिपि संबंधित प्रभाव-पत्र है ही नहीं तथा 29 में से 12 लोगों को अशुलिपि में शुन्य अंक प्राप्त हैं, फिर भी उन्हें प्रतिवेदक के पद पर बहाल कर लिया गया, जबकि प्रतिवेदक का मुख्य कार्य आशुलिपि ही है।
उधर, झारखंड विधानसभा सचिवालय में कुल अनुसेवक के 199 तथा माली मेहतर फरर्स एवं दरबान के 92 पदों के लिए साक्षात्कार हुए, जिसमें अनुसेवक के कुल 199 पदों के लिए साक्षात्कार समिति के सभी पांचों सदस्यों द्वारा अलग-अलग दिए गए अंकों में वाइटनर लगाकर अंकों को बढ़वा दिया गया। मजे की बात यह है कि कुल 199 चयनित अनुसेवकों में से 101 तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी के गृह जनपद के निवासी हैं। वैसे ही, पद्वति प्रतिवेदक तथा निजी सहायक की नियुक्ति हेतु साक्षात्कार लिया गया, लेकिन बिना किसी अनुभव वाले व्यक्ति को मन मुताबिक नंबर देकर उनका चयन किया गया।
प्रोन्नति को लेकर घपला
प्रोन्नति में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किए जाने वाले मामले ने भी सभी को हिलाकर रख दिया। हैरानी की बात यह है कि इसमें पात्रता सूची को ही ठीक ढंग से तैयार नहीं किया गया और मन चाहे लोगों को प्रोन्नति दे दी गई। आश्चर्यजनक बात यह है कि लगभग 18 साल बीत जाने के बाद भी झारखंड विधानसभा सचिवालय में कोई भी वरीयता सूची नहीं बनी है। झारखंड विधानसभा में किसी भी पद पर सरकार द्वारा निर्धारित प्रोन्नति में आरक्षण नियम का पालन नहीं किया गया। जैसे प्रतिवेदक में वरीय प्रतिवेदक के पद पर प्रोन्नति में चतुर्थ स्थान सामान्य श्रेणी के लिए होते हैं, लेकिन अनिल कुमार, जो ओबीसी श्रेणी में आते हैं, उन्हें सामान्य दर्शाते हुए प्रोन्नति दे दी गई। ठीक वैसी ही प्रक्रिया निजी सहायक आप्त सचिव की प्रोन्नति में भी अपनाई गई। वहीं, संजय कुमार को सामान्य दर्शाते हुए चतुर्थ स्थान पर प्रोन्नति दे दी गई, जबकि वह भी ओबीसी से आते हैं। अब जांच आयोग ने राज्य विधानसभा सचिवालय में दिसंबर 2004 से अब तक सभी पदों पर प्रोन्नत हुए अधिकारियों व कर्मचारियों को उनके मूल पद पर रखने करने की अनुशंसा की है, क्योंकि किसी भी परिस्थिति में उनकी प्रोन्नति जायज नहीं है। झारखंड विधानसभा नियमावली 2003 में किसी भी पद पर प्रोन्नति के लिए न्यूनतम कालावधि 2 वर्षों का उल्लेख है, लेकिन विधानसभा में लगभग कोई भी कर्मी, जो अधिकारी बन बैठे हैं, उन्होंने अपने किसी भी पद पर दो वर्षों की सेवा पूर्ण नहीं की है।
झारखंड विधानसभा सचिवालय में चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी के पद पर प्रोन्नति, जो समिति प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर होनी चाहिए थी, उसका उल्लंघन किया गया और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने कुल 17 ऐसे लोगों को चतुर्थ श्रेणी एवं तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति दे दी, जो किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा में बैठे ही नहीं और उनकी शैक्षिक योग्यता तृतीय संवर्ग पद के लायक भी नहीं थी। संचिका पर इंदर सिंह नामधारी द्वारा उनकी शैक्षणिक योग्यता को गौण करते हुए अनुभव के आधार पर कुल 17 लोगों को प्रोन्नति दे दी। जैसे कि अमीर दास तथा वीरेन्द्र कुमार। तृतीय श्रेणी में सहायक पद पर हुई समिति प्रतियोगिता परीक्षा में ये फेल थे, फिर भी उन्हें सहायक के पद पर प्रोन्नति दे दी गई। न्यायिक जांच आयोग ने अपनी जांच में पाया है कि जो तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 17 लोगों को प्रोन्नति दी गई है, वह गलत है। यही नहीं, उन्हें डिमोट करने की अनुशंसा के साथ-साथ प्रोन्नति देने वाले अधिकारियों एवं अध्यक्ष को दोषी मानते हुए उन पर राज्यपाल से कार्रवाई की अनुशंसा भी की है।
                                                         क्रमश...

Wednesday, 23 January 2019

आंकड़ों का बजट

आकड़ों का बजट
देवानंद सिंह
वित्तीय वर्ष 2०19-2० के लिए मुख्यमंत्री ने 85,429 करोड़ रुपए का बजट पेश किया है। पहली बार सरकार ने 'बाल बजट’ भी पेश किया है। यानि इसके तहत बच्चों के कल्याण के लिए विश्ोष व्यवस्था की गई है। सरकार की तरफ से कोशिश की गई है कि बजट में हर वर्ग को शामिल किया जाए। सरकार इस बजट को जहां हर वर्ग के कल्याण का बजट मान रही है, वहीं विपक्ष का मानना है कि बजट में महज आंकड़ेबाजी की बाजीगिरी की गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। लिहाजा, मुख्यमंत्री को यह भी साफ करना चाहिए था कि आखिर योजनाओं को धरातल पर कैसे सफल बनाया जाएगा?

सरकार के बजट की बात करें तो इसमें कोई शक नहीं है कि बजट में हर वर्ग को टच करने की कोशिश नहीं की गई है। किसानों, बुजुर्गों,बच्चों, महिलाओं, ग्रामीणों से लेकर युवाओं के कल्याण के लिए कुछ न कुछ किए जाने की व्यवस्था में बजट में की गई है। विकास के परिपेक्ष्य में देख्ों तो शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग व कृषि आदि क्ष्ोत्रों का भी पूरी तरह बजट में फोकस किया गया है। मेडिकल शिक्षा पर विश्ोष जोर दिया गया है। सरकार ने बजट में आकड़ेबाजी का गेम कर इसे चुनावी बजट बनाने में कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ी है, क्योंकि आगामी लोकसभा चुनावों की अग्निपरीक्षा से बीजेपी नीत सरकार को गुजरना है। 

इसमें शक नहीं है कि झारखंड आज तेज विकास दर के लिए देश के दूसरे राज्यों के लिए एक मिसाल है, लेकिन कई क्ष्ोत्रों की दयनीय जमीनी हकीकत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। शिक्षा के प्राथमिक स्तर के हकीकत को समझना जरूरी-सा लगता है, क्योंकि किसी भी राज्य की असली पहचान उसकी शिक्षा व्यवस्था से होती है। अगर, शिक्षा व्यवस्था ही चरमराई हुई हो तो हम आकड़ों को पेश करते रहें, उससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। कुल मिलाकर कहने का सार यह है कि राज्य की प्राथमिक शिक्षा का हाल काफी बुरा है। भले ही, प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा में नामांकन अनुपात में वृद्धि हुई हो, लेकिन सच्चाई यह है कि प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता की स्थिति बेहद दयनीय है। कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि 5वीं कक्षा के 4० फीसदी बच्चे ठीक ढंग से दूसरी कक्षा की किताब तक नहीं पढ़ पा रहे हैं। वहीं, दूसरी और तीसरी कक्षा के 5० फीसदी बच्चों को अक्षर ज्ञान तक नहीं है। ऐसे में, सवाल उठता है कि क्या स्कूलों में महज बच्चों की संख्या बढ़ाकर विकास होगा या फिर उनको मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाकर। सरकार योजनाओं का संचालन कर स्कूल, कॉलेजों में छात्रों की संख्या तो बढ़ा दे रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लिहाजा, बजट में इस तरफ फोकस किया जाना चाहिए था आखिर किस प्रकार शिक्षा की गुणवत्ता पर सुधार लाया जा सकेगा। वहीं, सरकार यह भी कहती है कि आने वाले दिनों में राज्य मेडिकल शिक्षा का हब बन जाएगा। राज्य में पांच नए हॉस्पीटल खोले जा रहे हैं, जिसमें तीन हॉस्पीटल तो बनकर तैयार हो गए हैं, लगभग डेढ़ हजार बच्चे आगामी दो वर्षों में डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर लेंगे। डेढ़ हजार महज आकड़ा है, लेकिन क्या सरकार इस तरफ भी कभी सोचती है कि ये छात्र अपने प्रोफेशन पर काम करने के लिए झारखंड को ही चुनेंगे या फिर दूसरे राज्यों का रुख करेंगे। ऐसा इसीलिए भी, क्योंकि जो पुराने मेडिकल कॉलेज हैं, उन पर तकनीकी कारणों से एमसीआइ की तलवार हर समय लटकी रहती है। सरकार को गिड़गिड़ाना पड़ रहा है कि गुणवत्ता सुधार लेंगे, पर बजट में इसका जिक्र न होना बेहद चिंताजनक है। युवाओं को कुशल बनाने की बात की गई है, लेकिन उनके शिक्षा के स्तर पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। स्किल मिशन फिलहाल निजी व सरकारी क्ष्ोत्रों के बीच लूट का स्रोत बनता जा रहा है, कहीं मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। शिक्षा के साथ-साथ ग्रामीण स्वास्थ्य भी बहुत मायने रखता है। सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य की बात तो करती है, लेकिन बगैर स्वास्थ्य कर्मियों का ध्यान दिए कैसे ग्रामीण स्वास्थ्य को सुधारा जा सकेगा, इस पर बात नहीं करती है। ऐसे में, इससे संबंधित योजनाएं कैसे सफल हो पाएंगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टर पढ़ाई कर निकल रहे हैं, लेकिन अपने ही राज्य में डॉक्टरों के पद खाली रह जा रहे हैं। विश्ोषज्ञ डॉक्टर दूसरे राज्यों के शहरों में जाने को लेकर लालायित नजर आते हैं। ऐसे में, सरकार कैसे ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की नैया पार लगाएगी, यह बड़ा सवाल है। बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं को निचले स्तर तक पहुंचाने के लिए मोहल्ला क्लीनिक व मुख्यमंत्री बाइक योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। लेकिन सवाल यह है कि पंचायत स्तर पर जो स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं, उसकी स्थिति कब सुधरेगी, इसके लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया में यह बात सरकार को सोचनी पड़ेगी कि महज चुनावी बजट है, इसीलिए आकड़ों की बाजीगिरी कर जनता को उलझा देते हैं, इससे काम नहीं चलेगा, बल्कि योजनाओं को धरातल पर लाने के लिए सरकार को अपने अधीन मॉनिटरिंग सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए भी कड़े कदम उठाने होंगे।

Monday, 21 January 2019

राष्ट्र संवाद के 19 वें स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल

राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि राष्ट्र संवाद की पूरी टीम को 19 वर्षों तक अथक संवाद स्थापित करने के लिए बधाई। राज्यपाल ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करना मीडिया के ईमानदार कार्यों पर निर्भर है। भारतवर्ष की राष्ट्रीय चेतना को सजग बनाने में मीडिया ने आशातीत योगदान दिया है। मीडिया का दायित्व है कि जनमानस को सजग एवं जागरूक कर राष्ट्र के विकास में भूमिका निभाए। सत्य, सामाजिक दायित्व और विश्वसनीयता तीनों का समावेश होना अत्यंत ही जरूरी है। मीडिया आज सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक, खेलकूद जगत, व्यवसाय, विज्ञान, धर्म इत्यादि सभी क्षेत्रों में पूर्ण रूप से प्रवेश कर चुकी है जो समाज के लिए शुभ संकेत है।


राज्यपाल ने कहा कि निष्पक्ष एवं निर्भीक होकर विभिन्न विषयों में जनमानस को जाग्रत करने में मीडिया की भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रेस का लक्ष्य महान होना चाहिए उसे सच्चा समाजसेवक होना चाहिए। पत्रकार बंधु समाज की रीढ़ हैं, देश और समाज का नेतृत्व करते हैं। सर्वविदित है कि बुद्धिजीवियों का महत्व निर्विवाद है उन्हें समाज में दायित्वों के प्रति जागरूक होना चाहिए और लोगों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में बुद्धिजीवियों और पत्रकारों में अपनी भूमिका को भलीभांति समझा है। उन्होंने कहा कि  समाचार पत्रों में आम आदमी की सुरक्षा उनके विकास एवं अधिकारों की बात को मुखर करना मीडिया का दायित्व है। बाजार संस्कृति में पत्रकारिता सामाजिक सद्भाव की भी प्रमुख प्रवक्ता है। देश की संस्कृति को अक्षुण्ण रखने में तथा एक राष्ट्र के रूप में देश को सहेज कर रखने में समाचार पत्रों की महती भूमिका है। शहर से लेकर गांव तक आज घने जंगलों में भी मीडिया का प्रभाव पहुंच गया है। आज के समय में मीडिया का प्रभाव लोगों के अंदर इतना अधिक है कि लोगों के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है।


राज्यपाल ने कहा कि देश को आगे लाने में युवा संपादकों की भूमिका सराहनीय होनी चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि आप जितने भी युवा संपादक आए हैं अपनी भूमिका को समझें। राज्यपाल ने कहा कि मीडिया संस्थान लोगों की समस्याओं को सरकार की नजरों में ला सकते हैं और सरकार की जो उपलब्धियां, कमियां और खामियां हैं उन्हें भी लोगों के सामने ला सकते हैं। यह एक सेतु का काम करते हैं यह सेतु सशक्त होना चाहिए इसलिए इसे लोकतंत्र का चतुर्थ स्तम्भ भी कहा गया है। चतुर्थ स्तंभ कमजोर नहीं होना चाहिए। इसे मजबूत होना चाहिए और किसी से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

*सांसद श्री विद्युत वरण महतो का संबोधन*
सांसद श्री विद्युत वरण महतो ने कहा कि राष्ट्र संवाद शुरुआत के दिनों से ही लगातार प्रकाशन में है। लगातार संघर्ष करते हुए और कम समय में अनेक उपलब्धियां हासिल की। समाज के प्रति इनका समर्पण भाव देखने को मिलता है इतने कम संसाधनों में भी दूरदराज के क्षेत्रों की खबरों को भी बखूबी प्रस्तुत किया।

*मंत्री श्री सरयू राय का संबोधन*
खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग, झारखंड सरकार के मंत्री श्री सरयू राय ने कहा कि राष्ट्र संवाद से हम सभी अच्छी तरह परिचित हैं। इन्होंने सतत प्रकाशन का 19 वां वर्ष पूर्ण किया है। यह इनके सजग और सतत प्रयासों का प्रतिफल है। मंत्री सरयू राय ने राष्ट्र संवाद परिवार को बधाई देते हुए कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले समय में इसी तरह से यह पत्रिका अपनी सभी विशेषताओं के साथ हम सभी के बीच आती रहेगी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता जगत की कई कठिनाइयों से रूबरू होते हुए राष्ट्र संवाद आज हम सभी के पास पहुंची है। उन्होंने कहा कि लघु पत्रिकाओं से यह उम्मीद रहती है कि जिन महत्वपूर्ण खबरों को बड़े अखबारों में स्थान नहीं मिल पाता उन खबरों से भी हम वाकिफ होंगे। अखबार समाचारों का ही माध्यम नहीं होकर सीखने और समझने का भी जरिया हैं। हमेशा ही अखबार सत्ता और व्यवस्था के समक्ष मुखातिब रहते हैं। सजग पत्र पत्रिका का प्रथम दायित्व होता है कि वह यह देखें कि हमारी व्यवस्थाओं में सुधार की गुंजाइश है तो उसकी ओर संकेत करें और व्यवस्था के संचालकों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करें।

Sunday, 20 January 2019

काफ़ी टेबल बुक की एक झलक .....

कठिन राजनीतिक संघर्ष से निकली शख्सियत

देवानंद सिंह
21वीं सदी के इस दौर में भी जहां महिलाओं के अधिकारों का हनन जारी है, वहीं महिलाओं ने अपनी लगन, दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत की बदौलत वह मुकाम हासिल किया है, जो समाज के लिए प्रेरणादायी है। शिक्षा, साहित्य, खेलों से लेकर राजनीति में भी कई महिलाओं ने एक मुकाम स्थापित किया है। जब राजनीतिक पार्टियां संसद में महिलाओं की संख्या बढ़ाने को लेकर एकमत नहीं हो पा रही हैं, तब भी महिलाएं अपनी विलक्षण प्रतिभा की बदौलत इतिहास में जगह बना रहीं हैं।

 झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ऐसी ही शख्सियतों में एक हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी शिखर को छुआ है। उन्हें राज्य की पहली महिला राज्यपाल होने का गौरव हासिल है। जिस तरह उन्होंने एक पार्षद से लेकर झारखंड के राज्यपाल का सफर पूरा किया है, वह न केवल सभी महिलाओं के लिए, खासकर आदिवासी महिलाओं के लिए आदर्श और प्रेरणादायक है। वह ऐसे राज्य से ताल्लुक रखती हैं, जहां 2014 की मोदी लहर में भी भाजपा का महज एक सीट पर खाता खुल पाया था। राज्य में लोकसभा की 21 सीटें हैं। 20 सीटें बीजद के हक में गई थीं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका राजनीतिक संघर्ष कितना कठिन होगा।
 वह वर्ष 2000 से 2004 तक ओडिशा विधानसभा में रायरंगपुर से विधायक तथा राज्य सरकार में मंत्री भी रहीं। वह पहली ओडिया नेता हैं, जिन्हें किसी भारतीय राज्य की राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

वह भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल की गठबंधन सरकार में 6 मार्च 2000 से 6 अगस्त 2002 तक वाणिज्य और परिवहन के लिए स्वतंत्र प्रभार की राज्य मंत्री तथा 6 अगस्त 2002 से 16 मई 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री रहीं। बीजेपी के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन जैसे नेताओं के साथ-साथ राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवारों में भी द्रौपदी मुर्मू का नाम सामने आ चुका है, जो उनकी अभूतपूर्व राजनीतिक शख्सियत को प्रदर्शित करता है। झारखंड विधानसभा में झामुमो मुख्य विपक्षी पार्टी है, उसी जनाधार की आजसू पार्टी भाजपा गठबंधन की सरकार में पार्टनर है। संयोग से द्रोपदी मुर्मू झारखंड की भी पहली आदिवासी महिला राज्यपाल हैं।

 द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के एक आदिवासी परिवार में हुआ था। रामा देवी विमेंस कॉलेज से बीए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने ओडिशा के राज्य सचिवालय में नौकरी से शुरूआत की। अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत उन्होंने 1997 में की थी, जब वह नगर पंचायत का चुनाव जीत कर पहली बार स्थानीय पार्षद (लोकल कौंसिलर) बनीं।

 साफ-सुथरी व अभूतपूर्व राजनीतिक छवि के कारण द्रौपदी मुर्मू को बीजेपी हाईकमान से हमेशा अच्छे और महत्त्वपूर्ण पदों के लिए वरीयता मिलती रही। वह बीजेपी के सामाजिक जनजाति (सोशल ट्राइब) मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के तौर पर काम करती रहीं और 2015 में उनको झारखंड का राज्यपाल बना दिया गया। द्रौपदी मुर्मू का किसी राज्य का राज्यपाल बनना, उनके राजनीतिक करियर का सबसे बेहतरीन समय रहा होगा, परंतु बीजेपी के पास जैसे इस साफ-सुथरी छवि वाली आदिवासी नेता के लिए और भी बड़ी योजना थी। इसका उदाहरण था, देश के प्रथम नागरिक के लिए उनके नाम पर विचार किया जाना। राज्यपाल के रूप में भी उनकी विराट छवि व सोच हमेशा उजागर होती रही है। वह राज्य की संवैधानिक मुखिया के तौर पर अभूतपूर्व कार्य कर रही हैं।

   मंत्री परिषद् और राष्ट्रपति के मध्य संवाद, समन्वय का महत्वपूर्ण दायित्व राज्यपाल के पद को मजबूत और सशक्त बनाता है। यह सुखद है कि झारखंड राज्य के सबसे बड़े संवैधानिक पद को संभालने के बाद से ही द्रोपदी मुर्मू ने अपनी आत्मीय शैली और संवादधर्मी प्रकृति से राज्य को प्रगति के अनूकूल संदर्भों और प्रसंगों को सुदृढ़ बनाया है। उन्होंने अपने अभिभावकत्व से निरंतर प्रेरणा भरने का काम किया है। राज्यपाल राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होता है, इसीलिए उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। कुलाधिपति के तौर पर उन्होंने अनवरत् अभिनय प्रयोग और शैली से झारखंड राज्य के विश्वविद्यालयों को एक नई ऊर्जा से भरने का काम किया है। राज्य के मजबूत और स्थायी विकास के लिए वह राज्य की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ किए जाने पर हमेशा बल देती रही हैं। वह मानती रही हैं कि जब आधारभूत संरचना उन्नत होगी, तभी राज्य में निवेश का माहौल तैयार होगा तथा राज्य के विकास को गति मिलेगी। किसानों को लेकर भी उनकी चिंता समय-समय पर जगजाहिर होती रही है, क्योंकि वह जानती हैं कि खुशहाल किसान ही खुशहाल झारखंड कर निर्माण कर सकते हैं। लिहाजा, वह किसानों की बेहतरी तथा राज्य को खाद्यान्नों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देती हैं। वह इस मामले में राज्य सरकार के कार्यों की सरहना भी करती हैं, क्योंकि सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से राज्य के किसानों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है तथा वे अपने वर्तमान एवं भविष्य के प्रति आशान्वित नजर आ रहे हैं।

  सदन की गरिमा को ठेस न पहुंचे, इसीलिए वह समय-समय पर विधानसभा सदस्यों से अपील भी करती रहती हैं। वह हमेशा विधायकों से कहती हैं कि किसी भी विधेयक पर गंभीरतापूर्वक बहस हो, प्रतिपक्ष को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी अनुशासित होकर चर्चा करें, सदन की गरिमा को कदापि ठेस न पहुंचे, क्योंकि अनुशासित रहकर की बेहतर सुझाव दिया जा सकता है। अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में वह हमेशा तत्पर रहती हैं। वह संविधान में वर्णित राज्य की कार्यपालिका एवं विधायिका की प्रमुख तथा संविधान की राज्य में संरक्षक के रूप में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करती हैं। वह हमेशा जोर देती हैं कि झारखंड में विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। झारखंड में उपलब्ध संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग एवं मानव संपदा की क्षमताओं के सदुपयोग के बलबूते झारखंड देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में अपना स्थान बना सकता है।

 वह सरकार द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करने में पीछे नहीं रहती हैं। वह स्वीकार करती हैं कि हमारी सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक नीतियों में आवश्यक बदलाव किए हैं। इसी क्रम में औद्योगिक क्षेत्र में सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया गया तथा निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करने हेतु श्रम कानूनों का सरलीकरण किया गया है। सरकार के अच्छे प्रयासों का ही प्रतिफल है कि श्रम सुधारों के मामले में झारखंड लगातार दूसरी बार देश में प्रथम स्थान पर रहा। राज्य में निवेश को आकर्षित करने हेतु मोमेंटम झारखंड के तहत देश-विदेश में रोड-शो का आयोजन कर झारखंड की ब्रांडिग की। वह मानती हैं कि अपनी नई नीतियों एवं फैसलों के आधार पर झारखंड औद्योगिक विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। आज देश-विदेश की कई बड़ी औद्योगिक कंपनियां झारखंड में निवेश करने हेतु रुचि एवं तत्परता दिखा रही हैं। राज्य सरकार को हजारों करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं तथा इससे संबंधित एमओयू भी किया गया है। यह झारखंड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
 वह राज्यों के विभिन्न जिलों का भ्रमण करने में भी पीछे नहीं रहती हैं, क्योंकि उनकी हमेशा आकांक्षा रहती है कि वह अधिक-से-अधिक लोगों से संवाद स्थापित करें। वह जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि सुदूरवर्ती ग्रामों, जिन्हें पिछड़े ग्रामों अथवा क्षेत्रों की संज्ञा दी जाती है, का भ्रमण भी करती हैं। वहां वे उपलब्ध आधारभूत सेवाओं, जन-सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य के संदर्भ में जानकारी लेती हैं, साथ ही क्षेत्रीय पदाधिकारियों से विकास की गतिविधियों की जानकारी लेती हैं। ब्रिटिश शासन का विरोध करने वाले बिरसा मुंडा के वंशजों से भी वह मिलती रहती हैं और राज्य के लोगों को बिरसा मुंडा का राष्ट्र एवं राज्य के प्रति त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित करती रहती हैं। वह कहती हैं कि बिरसा मुंडा से इस राज्य का घनिष्ठ संबंध है, राज्य की प्रतिष्ठा इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी दासता एवं शोषण के विरुद्ध धरती आबा ने कड़ा संघर्ष किया तथा ब्रिटिश शासन का विरोध किया। राष्ट्र एवं राज्य के प्रति उनका त्याग और बलिदान अविस्मरणीय है। उनका आदर्श चरित्र और विचार सदैव पथ प्रदर्शन का कार्य करता रहेगा। राजभवन को आमजनों से जोड़ने हेतु भी उन्होंने व्यापक प्रयास किए हैं। गांवों को सशक्त बनाने, सबके शिक्षित होने पर जोर, विश्वविद्यालयों की दशा में सुधार के लिए व्यापक पहल, कौशल विकास की दिशा में प्रयास, रचनात्मक कार्यों की दिशा में पहल, युवाओं से संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार भी उनकी भूमिका सराहनीय रही है।

 वह हाईकोर्ट परिसर में विश्वविद्यालय मामलों के लिए आयोजित होने वाली लोक अदालतों को धारदार बनाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहती हैं। वह न्यायिक प्रणाली को सफल और सस्ता माध्यम भी मानती हैं और इसके प्रसार पर भी बल देती हैं। लोक अदालतों को जन आंदोलन का रूप मिले, इसके लिए वह हमेशा मुखर रहती हैं। आज प्रकृति तमाम संकट झेल रही है। ऐसे में, वह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बहुत काम करती रहती हैं। वह इसके लिए लोगों की सहभागिता पर भी विशेष जोर देती हैं। वह कहती हैं कि पेड़ लगाना सिर्फ सरकार का काम नहीं है, बल्कि इसमें जन सहभागिता भी बहुत आवश्यक है। वह लोगों को हमेशा बड़े पैमाने पर फलदार पौद्ये लगाने के लिए प्रोत्साहित करती   रहती हैं।
 वह कहती हैं कि हमें अपने राज्य की हरियाली को बचाकर रखना है और अपने जीवन में अधिक-से-अधिक पेड़ लगाकर उनकी नियमित देखभाल करनी चाहिए। वह घेरलु उत्सवों जैसे विवाह, जन्मदिन, सालगिरह, अपने पूर्वजों की स्मृति में एवं अन्य शुभ अवसरों पर लोगों को विभिन्न प्रजाति के पौद्ये लगाए जाने के लिए भी प्रोत्साहित करती रहती हैं। वह इस बात को भली-भांति जानती हैं कि बढ़ती आबादी के दबाव से पर्यावरण पर असर हुआ है। पेड़ केवल हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि मानव समाज के लिए भी आवश्यक हैं। हमारे राज्य झारखंड का अर्थ ही है कि जहां पेड़-पौधों की बहुतायत हो।
  राज्य की शिक्षा की दशा को सुधारने में उनका कोई सानी नहीं है। इस क्षेत्र में उनके द्वारा किए जाने वाले व्यापक प्रयास उजागर होते रहे हैं। वह इस कार्य में न केवल अभिभावकों को आगे आने के लिए प्रेरित करती रहती हैं, बल्कि समाज को भी सक्रियता से अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए भी प्रेरित करती हैं। उनकी सोच है कि झारखंड का प्रत्येक बच्चा शिक्षित हो। साथ ही, वह कहती हैं कि शिक्षा का अभिप्राय केवल डिग्री या उपाधि हासिल करना नहीं है। डिग्री प्राप्त करना तो खानापूर्ति करना हो गया। इसके लिए वह व्यवसायिकता भी विशेष जोर देती हैं। इसके इतर वह शिक्षा के क्षेत्र में अब सिर्फ साक्षरता पर न जोर देते हुए गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुलभ कराने की सोच भी रखती हैं। वह मानती हैं कि हमारे सरकारी विद्यालयों में भी बच्चों को ऐसी गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिले कि इन विद्यालयों में न केवल नामांकन के प्रति आकर्षण बढ़े, बल्कि ये अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरक बनें। वह बच्चों के चारित्रिक विकास पर भी बल देती हैं। वह कहती हैं कि धन जाने पर फिर से प्राप्त हो सकता है, लेकिन एक बार चरित्र पर दाग लगने के बाद वह पुन: लौट कर नहीं आता है।
  राज्य का प्रथम नागरिक होने के नाते उन्हें स्पष्ट और समावेशी नागरिकता का बोध है, तो सह्दयता और भावुकता के सहज स्त्री सुलभ गुणों के कारण वह सामाजिक सदाशयता और सोद्धेश्यता को मानवीय तरीकों से देखने की अभ्यस्त भी हैं। विद्यालयों, अस्पतालों, सामाजिक संस्थानों के भ्रमण के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विषयों के लोक कल्याणकारी भावनाओं पर वह बल देती रहती हैं। इसी क्रम में स्त्री, दलित, दिव्यांग आदि के सामाजिक सशक्तिकरण के लिए वह अपनी पूरी प्रतिबद्धता उन पर न्यौछावर कर देती हैं। समाज के सभी वर्गों की सुध लेकर वह अपनी ममतामयी छवि का भी परिचय देती हैं। भारत की समासिकता उसकी सामाजिक समरसता में है। इसका आत्मसात करते हुए वह संवाद कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं, जिसमें सर्वधर्म सम्भाव और वसुधैव कुटुम्बकम के प्रत्यय पर बल देकर वह समाज के सभी वर्गों से मिलती हैं और उन्हें संरक्षण की छांव भी प्रदान करती हैं। झारखंड के प्रमुख पर्वों का आयोजन वह सामाजिक सद्भाव के विस्तार के लिए करती हैं, साथ ही जन सहभागिता को जोड़कर, उससे जुड़कर मानवता का संदेश देती भी नजर आती हैं। लोगों के प्रमाण के लिए राजभवन का प्रागंण खोलकर वह अपनी लोकतांत्रिक छवि को भी सशक्त रूप भी प्रदान करती हैं।

  राज्यपाल का पद संभालने से लेकर अब तक वह निरंतर अपनी सोदेश्यपूर्ण सक्रियता से राजभवन का अर्थ विस्तार करती आयी हैं। स्त्री होने के नाते ममता उनका धर्म है, भावना उनकी थाती, संवैधानिक प्रधान होने के नाते संवाद उनके अस्त्र हैं तो सौम्यता उनकी पहचान, कुलाधिपति होने के कारण तत्परता उनकी शैली है, तो सजगता एवं आवश्यक दिशा-निर्देश उनका प्रशासकीय व्यक्तित्व। इन सबसे ऊपर अभिभावकत्व का स्नेह और आत्मीयता उनकी यात्रा है, जिसमें वह हमेशा तत्पर रहती हैं।अपने अधीनस्थ अधिकारियों, प्रधान सचिव, शैक्षणिक सलाहकार, संबद्ध पदाधिकारियों और कर्मियों को निर्देश देकर वह एक नए कल की ओर बढ़ रही हैं, जहां भोर की किरणें अपनी सिंदूरी थाली में राज्य के विकास की आरती के लिए खड़ी हैं।  

समाज को बांटने की कोशिश

समाज को बांटने की कोशिश लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान कल यानि 11 अप्रैल से शुरू हो जाएगा। इस चरण के लिए चुनाव प्रचार 9 अप्रैल को श...