Wednesday, 8 September 2021

भाजपा विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री पर असंसदीय टिप्पणी कर किया लोकतंत्र की मर्यादा का हनन, जमीन से उठकर मुकाम तक पहुंचे हैं बन्ना गुप्ता

देवानंद सिंह

भाजपा विधायक सीपी सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को टेंपों वाला कहकर न केवल संसदीय मर्यादाओं को लांघा है, बल्कि जनता का अपमान भी किया है, खासकर मेहनतकश टेंपो चालकों, गरीबों, ओबीसी समाज और पिछड़ा वर्ग के लोगों का, क्योंकि बन्ना गुप्ता इन्हीं लोगों की आवाज हैं तो सवर्णों का सम्मान करना इन्हें अपने परिवार से मिला। इसीलिए उन्हें जन नायक की श्रेणी में रखा जाता है। यह बन्ना गुप्ता के जननायक होने का ही परिचायक है कि भाजपा विधायक सीपी सिंह की स्वाथ्य मंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी का पूरे राज्य में विरोध हो रहा है। समाज का हर वर्ग सड़क पर उतरकर विरोध कर रहा है। रांची के विधायक सीपी सिंह का जमशेदपुर पश्चिम क्षेत्र के विभिन्न



 चौक चौराहों पर पुतला दहन किया गया। उनकी मांग है कि इस मामले में सीपी सिंह को असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने के लिये सदन में माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक वह माफी नहीं मांगते, तब तक विरोध जारी रहेगा। जिस तरह लोगों में भाजपा विधायक के खिलाफ रोष दिखाई दे रहा है, उससे लगता है कि विरोध जल्द खत्म नहीं होने वाला है। इसीलिए भाजपा विधायक को माफी मांग लेनी चाहिए। वैसे भी किसी भी नेता की पहचान उसके कार्यों से होती है। बन्ना गुप्ता ने भी अपनी पहचान अपने कार्यों से बनाई है। उन्होंने जिस तरह अपने राजनीतिक सफर में संघर्ष किया है, उस तरह का संघर्ष बहुत कम नेता करते हैं, जब ऐसे नेता मेहनतकश वाहन चालकों, गरीबों, ओबीसी समाज व पिछड़ा वर्ग की आवाज बनते हैं और सवर्णों का दिल से सम्मान करते हैं तो आमजन में उसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जाती है, यही वजह है कि बन्ना गुप्ता की लोकप्रियता का ग्राफ आज तेजी से बढ़ता जा रहा है, उनकी यह लोकप्रियता आमजन के बीच ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी वह काफी लोकप्रिय हैं। फेसबुक, ट्विटर व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। लोग उनके राजनीतिक संघर्ष के बारे में जानने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं। यह सब ऐसे ही नहीं हुआ है बल्कि बन्ना गुप्ता ने इसके लिए जनता के बीच रहकर कड़ी मेहनत की है और सत्ता से बाहर रहते हुए भी और सत्ता में रहते हुए भी जनता के मुद्दों की लड़ाई लड़ी है। ऐसे जननायक पर एक दूसरे माननीय द्वारा अभद्र टिप्पणी करना बिलकुल भी शोभा नहीं देता है। भारत संसदीय लोकतंत्र की सफलता के लिए जाना जाता है, उसकी एक मर्यादा होती है, खासकर भाषा की मर्यादा तो होती ही है, इसीलिए जनप्रतिनिधियों को इसका विशेष ख्याल रखना चाहिए। लिहाजा, भाजपा विधायक द्वारा की गई टिप्पणी का विरोध जरूरी है, क्योंकि इससे उन्हें ही नहीं बल्कि अन्य जनप्रतिनिधियों को भी सबक मिलेगा।

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