Wednesday, 13 November 2019

जीत का सिक्सर लगाने को तैयार रघुवर दास

राज्य की सबसे प्रतिष्ठित पूर्वी जमश्ोदपुर विधानसभा सीट का चुनाव इस बार भी महत्वपूर्ण होगा। इस सीट का चुनाव हर बार इसीलिए महत्वपूर्ण बन जाता है, क्योंकि इस सीट से सूबे के मुख्यमंत्री रघुवर दास चुनाव लड़ते हैं। वह लगातार पांच बार से यानि 1995 से इस सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस हिसाब से मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने विधायक काल की सिल्वर जुबली भी मना रहे हैं। लिहाजा, मुख्यमंत्री के लिए यह चुनाव और भी अहम हो जाता है। इसके इतर विपक्षी गठबंधन उनके इस चुनाव को खास बनाने से रोकने की हरसंभव कोशिश करने में जुट गया है। ऐसे में, उम्मीद इस बात की बन गई है कि इस सीट को लेकर बीजेपी से लेकर विपक्षी गठबंधन काफी गंभीर है।

जब 1967 में सीटों का परिसीमन हुआ था तो जमशेदपुर पूर्वी सीट से कांग्रेस पार्टी की पहली विधायक सिने स्टार प्रियंका चोपड़ा की नानी मधु ज्योत्सना अखौरी बनीं थीं। 1967 से अब तक 12 चुनाव हो चुके हैं, जिसमें से आठ चुनाव बीजेपी जीत चुकी है, जिसमें से पिछले लगातार छह चुनावों की जीत बीजेपी की झोली में जा रही है, जबकि कांग्रेस-सीपीआई 2-2 बार जीत हासिल कर चुकी हैं। 1969 और 1972 में सीपीआइ की तरफ से केदारदास, 1977 में जनता पार्टी के दीनानाथ पांडेय जीते थे , वहीं, 1980 में भी भाजपा से दीनानाथ पांडेय ही जीते थे । वहीं, 1985 में कांग्रेस के केडी नरीमन व 1990 में दीनानाथ पांडेय फिर से जीते। उसके बाद 1995 से 2014 तक लगातार इस सीट से जीत का सेहरा रघुवर दास के सिर पर बंधता आया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सीट बीजेपी के साथ-साथ रघुवर दास के लिए कितनी महत्वपूर्ण है और विपक्षियों के लिए इस सीट पर बीजेपी की जीत की पुर्नावृत्ति को रोकने की चुनौती है। लिहाजा, चुनाव की महत्वपूर्ण तैयारी दोनों ख्ोमों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। मतदाताओं की संख्या के हिसाब से भी पूर्वी जमश्ोदपुर विधानसभा सीट बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां 3 लाख 450 मतदाता हैं, जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 56 हजार 469 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 1 लाख 43 हजार 981 है। पिछले लगातार तीन चुनावों में इस सीट पर पार्टियों को मिलने वाले वोट प्रतिशत की बात करें तो 2०14 में बीजेपी को 61.48 फीसदी मत मिले थ्ो, जबकि कांग्रेस को 19.78 फीसदी मतों से संतोष करना पड़ा था। वहीं, झाविमो को 12.37 फीसदी मत मिले थ्ो।


अन्य पार्टियों की झोली में महज 6.37 फीसदी मत गए थ्ो। वोट संख्या की बात करें तो बीजेपी की तरफ से रघुवर दास प्रत्याशी थे, जिन्होंने 1 लाख ०3 हजार 427 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि दूसरा नंबर कांग्रेस प्रत्याशी आनंद बिहारी दुबे का रहा था, जिन्हें कुल 33 हजार 270 मत पड़े थे । झाविमो से प्रत्याशी रहे अभय सिंह को कुल 20 हजार 815 मत पड़े थे । वहीं, 2009 की बात करें तो यहां वोट प्रतिशत के हिसाब से बीजेपी की स्थिति 2014 व 2005 के मुकाबले थोड़ी खराब रही थी, भले ही जीत पार्टी के खाते में ही गई थी। बीजेपी को 5०.29 फीसदी वोट मिले थे , जबकि झाविमों को 29.73 फीसदी मत मिले थ्ो। निर्दलीय उम्मीदवार को 9.8० फीसदी व अन्यों के खाते में 1०.18 फीसदी वोट पड़े थे । संख्या के हिसाब से बात करें तो बीजेपी की तरफ से विजयी हुए प्रत्याशी रघुवर दास को 56 हजार 165 वोट पड़े थ्ो, जबकि झाविमो से प्रत्याशी रहे अभय सिंह को 33202 वोट मिले थ्ो, वहीं तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय उम्मीदवार आनंद बिहारी दुबे को 10 हजार 944 वोट पड़े थे । 2005 के चुनावों में बीजेपी को 52.97 फीसदी वोट मिले थ्ो, जबकि कांग्रेस को 37.9० फीसदी, राजद को 2.०8 फीसदी व अन्य को 6.96 फीसदी वोट मिले। यह चुनाव भी बीजेपी के प्रत्याशी रघुवर दास ने ही जीता था, जिन्हें 65 हजार 136 वोट मिले थ्ो, जबकि कांग्रेस से हारे प्रत्याशी रामाश्रय प्रसाद को 46 हजार 716 मत मिले थे । वहीं, तीसरे स्थान पर रहे राजद के प्रत्याशी इंद्रजीत सिंह कालरा को 2567 मत मिले थे ।

इस बार भी स्थिति देखने वाली होगी कि कौन-सी पार्टी अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकती है। मुख्यमंत्री रघुवर दास के पास जिन कार्यों को अंजाम दिया गया है, उन कार्यों की सूची होगी, जबकि विपक्षियों के पास सरकार के अधूरे कार्यों की सूची होगी। ऐसे में, इस बात से बिल्कुल भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि मुद्दों की लड़ाई नहीं होगी। वैसे, सरकार ने इस सीट के अंतर्गत जो महत्वपूर्ण कार्य कराए हैं, उनमें तीन कार्य महत्वपूर्ण हैं, जिनमें पाइप लाइन से जलापूर्ति की आपूर्ति का शुभारंभ, सिदगोड़ा में सब-स्टेशन का शुभारंभ व क्ष्ोत्र के सभी स्कूलों में भवनों का निर्माण आदि। लेकिन कुछ ऐसे कार्य भी हैं, जो अधूरे हैं, जिन्हें विपक्षी पार्टियां मुद्दा बना सकती हैं, जिनमें कई जलापूर्ति की अधूरी योजनाएं, सुवर्णरेखा नदी पर सिग्नेचर ब्रिज का अधूरा काम व महिला कौशल विकास केंद्र का न बन पाना आदि शामिल हैं। बहरहाल नामांकन बाकी है , अभी से जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही है उससे यह पता चलता है कि यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार दिख रहे हैं । भाजपा जिलाध्यक्ष कांग्रेस जिलाध्यक्ष  और जेवीएम के जिला अध्यक्ष की अग्नि परीक्षा भी विधानसभा चुनाव में होगी।

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