Friday 15 November 2019

विकास और जातीय मुद्दे डालेंगे चुनाव में असर

देवानंद सिंह
 आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर जितनी तैयारी में सत्तारूढ़ बीजेपी है, उतनी ही तैयारी में विपक्ष भी जुटा हुआ है। बीजेपी से प
हली बार राज्य में पांच साल तक मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा करने वाले रघुवर दास फिर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे, वहीं हेमंत सोरेन महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे। यह साफ हो चुका है कि महागठबंधन उनके नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगा। असल में, महागठबंधन में शामिल तीनों दलों झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है, जिसके तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा सबसे अधिक 43, कांग्रेस 31 और राष्ट्रीय जनता दल 7 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। राष्ट्रीय जनता दल को देवघर, गोड्डा, कोडरमा, चतरा, बरकटा, छतरपुर और हुसैनाबाद सीटें मिली हैं। उधर, बाबूलाल मरांडी का झारखंड विकास मोर्चा महाठबंधन का हिस्सा नहीं है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने पहले ही घोषणा की थी कि उनकी पार्टी कम-से-कम 42 या 43 सीटों पर लड़ेगी। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 41 है।

 इस प्रकार राज्य में चुनाव की तस्वीर लगभग-लगभग साफ हो चुकी है। इतना अवश्य है कि कुछ दिग्गजों का टिकट कन्फर्म नहीं हुआ है, जिनमें सरयू राय जैसे दिग्गज भी शामिल हैं। राज्य की पूर्वी जमश्ोदपुर विधानसभा सीट से लेकर जुगसलाई, मांडर, जमश्ोदपुर-ईस्ट, जमश्ोदपुर पश्चिम, तमाड़ व कोलेबिरा ऐसी सीटें हैं, जहां चुनावी समीकरण ऑल ओवर रिजल्ट को बहुत हद तक प्रभावित करेंगी, इसीलिए सतारूढ़ बीजेपी समेत अन्य पार्टियों के लिए ये सीटें बहुत मायने रखती हैं। हालांकि इस बात से बिल्कुल भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि राज्य के चुनावों में जातीय समीकरणों का असर नहीं दिख्ोगा। निश्चित ही, जातीय समीकरण चुनावों में असर डालेंगे, लेकिन विकास का मुद्दा भी अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री रघुवर दास के पास चुनाव मैदान में उतरने के लिए तीन चीजें काफी महत्वपूर्ण हैं, जिसमें पीएम मोदी का चेहरा और केंद्र सरकार द्बारा कराए गए कार्यों का पूरा खाका होगा, वहीं उनके द्बारा राज्य में कराए गए विकास कार्यों का खाका भी होगा। इन्हीं मुद्दों को लेकर वह जनता के बीच अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करेंगे। निश्चित ही विकास के पुलिंदे ने राज्य की तस्वीर बदली है।

 ऐसे में, इस बात की पूरी उम्मीद की जाती है कि इन मुद्दों के आगे विपक्ष को चुनौती का सामना करना पड़ेगा। वहीं, विपक्षी महागठबंधन के पास सरकार की नाकामियों को उजागर करने के लिए बहुत सारे मुद्दे नहीं रहेंगे, बल्कि हां इतना जरूर है कि सरकार के कुछ अधूरे प्रोजेक्टों के बदौलत वह बीजेपी को घ्ोरने की निश्चित ही कोशिश करेगा। वहीं, इससे अधिक वह जातीय समीकरणों को भी भुनाने का पूरा प्रयास करेगा।
 इस विधानसभा चुनाव में राज्य के 2.26 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मंत्रिमंडल निर्वाचन विभाग ने लगभग एक महीने पूर्व ही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के आधार पर मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया था। पुनरीक्षण में 86,864 पुरुष तथा 1,०6,872 महिला नए मतदाता के रूप में शामिल किए गए हैं। इस तरह 1,93,736 मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं। इस तरह राज्य में अब कुल मतदाताओं की संख्या 2,26,17,372 हो गई है। इसमें 1,18,16,०98 पुरुष और 1,०8,०1,274 महिला मतदाता शामिल हैं। इसी सूची के आधार पर झारखंड में विधानसभा का चुनाव संपन्न कराया जाएगा।


वैसे तो वोट बैंक अलग-अलग जातीय समीकरणों में बंटा हुआ है, जिसमें राज्य में आदिवासी वोट बैंक भी अच्छा खासा है। बीजेपी और महागठबंधन के पास दो तरह से जातीय समीकरणों को भुनाने की चुनौती रहेगी। बीजेपी का फंडा साफ होगा, वह विकास के नाम पर जातीय वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने का प्रयास करेगी, जबकि महागठबंधन पार्टी चेहरों के आधार पर यह कोशिश करेगी कि जातीय वोट बैंक उनकी झोली में आ जाए। राज्य विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरणों के अलावा महिला वोटर्स भी खास भूमिका निभाएंगी। इसीलिए पार्टियों की कोशिश भी महिला वोटर्स को भुनाने की रहेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सत्तारूढ़ बीजेपी ने इस बार पहली सूची में पांच महिलाओं को मौका दिया है। जातीय समीकरणों को ध्यान रखते हुए 12 नए चेहरों पर भरोसा जताया है। इस सूची में 17 एसटी, 6 एससी, 21 ओबीसी और 8 जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार हैं। इन 52 उम्मीदवारों की सूची में से 4० सीटों पर अभी भाजपा के विधायक हैं, लेकिन, भाजपा ने इनमें से 1० मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं, सिर्फ 3० विधायकों को टिकट मिला है। भाजपा ने अभी सरकार के तीन दिग्गज मंत्रियों की सीटों के उम्मीदवारों के नाम का खुलासा नहीं किया है। इनमें सरयू राय, नीलकंठ सिह मुंडा और अमर बाउरी शामिल हैं। सिर्फ यही नहीं, राज्य की 29 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करना बाकी है। भाजपा ने पूरे राज्य की जातिगत गणित को साधते हुए टिकट बांटने का प्रयास किया है। वहीं, विपक्षी महागठबंधन ने भी इन्हीं समीकरणों के आधार पर टिकटों का बंटवारा किया है। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी 65 से अधिक सीटें निकालने में सफल होती है या फिर महागठबंधन अपना जादू चला पाता है।
                                                 डार्क हॉर्स साबित होंगे मंत्री सरयु राय ।

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