Friday, 11 March 2022

यूपी में योगी आदित्यनाथ ने रचा इतिहास, प्रचंड बहुमत के साथ हासिल की जीत

 देवानंद सिंह

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में बीजेपी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक क्षण है। क्योंकि कोई सरकार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करने जा रही है। फिलहाल, बीजेपी राज्य में 276 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सपा बीजेपी से बहुत पीछे महज 1120 सीटों पर ही आगे चल रही है। जबकि कांग्रेस, बीएसपी जैसी पार्टियां दहाई तक के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाई हैं। जिस तरह के आंकड़े सामने आए हैं

जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम ने 2024 की तस्वीर साफ कर दी है उन्होंने कहा की परिवारवाद राजनीति का सूर्यास्त होगा यूपी की जनता ने 2014 17 19 22 के चुनाव में विकासवाद की राजनीति पर विश्वास जताया है यूपी की जनता ने दूसरे दलों को सबक सिखाया है

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि 37 साल बाद यूपी की धरती पर कोई मुख्यमंत्री दोबारा मुख्यमंत्री की शपथ लेगा

जीत के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करिश्माई नेतृत्व गृहमंत्री अमित शाह की सोच और राष्ट्रीय अध्यक्ष की मेहनत के साथ-साथ हर एक कार्यकर्ता को यह जीत समर्पित है



वह सपा के लिए किसी सदमे से कम नहीं है, क्योंकि जिस अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को सूबे में मजबूत माना जा रहा था, वह योगी आदित्यनाथ के आगे कहीं टिकती हुई नजर नहीं आई। अखिलेश का सपना चकनाचूर हो गया तो विरासत बचाने आई प्रियंका गांधी जनता की दिलजीत पाने में असफल रही मायावती जिस वोट बैंक को अपना मानती रही वोटरों ने सिरे से उसे नकार दिया इन परिणामों से साफ तौर पर पता चलता है कि प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ किसी भी प्रकार की लहर नहीं थी और न ही किसान आंदोलन का कोई असर देखने को मिला। योगी आदित्यनाथ बहुमत से भी कहीं बड़े आंकड़े के साथ जीतते हुए नजर आ रहे हैं। योगी जी खुद गोरखपुर शहर की सीट एक लाख से अधिक सीटों से जीतने में सफल हुए हैं। हालांकि अखिलेश यादव भी करहल की सीट के 60 हजार वोटों से जीतने में सफल रहे हैं। लेकिन अखिलेश का सत्ता में आने का अपना चकनाचूर हो गया। समाजवादी पार्टी के लोग कोरोना, बेरोजगारी, किसान आंदोलन के नाम पर योगी आदित्यनाथ की सरकार को घेरने की कोशिश करते रहे हों, लेकिन परिणामों से लगता है कि कोरोना काल के दौरान योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई मेहनत को लोग भूले नहीं, क्योंकि कोरोनाकाल में योगी आदित्यनाथ का कार्य पूरे देश के लिए नजीर बना था। चाहे गरीब परिवार तक राशन पहुंचाने की बात हो या फिर अन्य तरह के कार्य, उन सभी से पूरे देश के काफी प्रभावित किया और प्रदेश की जनता भी, उनके कार्यों से खुश रही, उनकी यह खुशी परिणामों में साफतौर पर देखने को मिल रही है। दूसरा अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की बात करें तो वह केवल हवाबाजी ही करती नजर आई। पिछले पांच सालों में सभी ने देखा कि समाजवादी पार्टी के नेता जनता के बीच से गायब रहे, कोरोनाकाल में अखिलेश भी नदारद रहे। वैक्सीन को उन्होंने भाजपा की वैक्सीन बता दी, जिसका लोगों के बीच गलत संदेश गया। चुनाव के दौरान भी उन्होंने केवल सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे जीतने की कोशिश की, लेकिन जमीनी तौर पर इसका कोई भी प्रभाव देखने को नहीं मिला। पश्चिमी यूपी में जिस तरह से आरएलडी से गठबंधन कर उन्होंने अच्छी सीटें जीतने की उम्मीद उन्होंने की थी, वह भी धरी की धरी नजर आईं। इसीलिए अखिलेश को एक बार फिर विपक्ष में ही बैठकर संतोष करना पड़ेगा। बात कांग्रेस और बसपा की करें तो ये दोनों ही पार्टियां दूर-दूर तक भी नजर नहीं आ रहीं है। न तो बसपा का राज्य में दलित कार्ड चला और न ही कांग्रेस की तरफ से प्रियंका द्वारा दिया गया लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा चला। यानि कुल मिलाकर देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस उत्तर प्रदेश में एक बार फिर जनता का विश्वास जीतने में सफल नहीं हो पाई। यह पार्टी के लिए बहुत ही निराशाजनक साबित हुआ। शायद ही पार्टी हाल-फिलहाल में इस शॉक से निपट पाए।

No comments:

Post a Comment

प्रोत्साहन राशि मामला :सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग और उनके अधिकारी

स्वास्थ्य मंत्री के न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने से सरयू राय के आरोप होंगे बेनकाब! देवानंद सिंह सरयू राय द्वारा कोरोनाकाल में स्वास्थ्य म...